धृति क्या है? जानिए
धृति धर्म के दस प्रमुख लक्षणों में प्रथम स्थान रखती है। मनुस्मृति (6.92) में धृति को धर्म का आधारभूत गुण माना गया है। धृति का अर्थ है—धैर्य, दृढ़ता, मानसिक स्थिरता और कठिन परिस्थितियों में भी सत्य तथा धर्म के मार्ग से विचलित न होना।
जीवन में सुख और दुःख, सफलता और असफलता, लाभ और हानि आते-जाते रहते हैं। जो व्यक्ति हर परिस्थिति में अपने मन को स्थिर रखकर सही मार्ग पर चलता है, वही धृति का पालन करता है।
धृति के मुख्य लक्षण
1. धैर्य
कठिन परिस्थितियों में घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखना।
2. दृढ़ संकल्प
सत्य और धर्म के मार्ग पर अटल रहना तथा अपने उद्देश्य से विचलित न होना।
3. मानसिक स्थिरता
सुख-दुःख, मान-अपमान और लाभ-हानि में संतुलित रहना।
4. आत्मविश्वास
विपरीत परिस्थितियों में भी स्वयं पर विश्वास बनाए रखना।
5. संयम
भावनाओं और आवेश में आकर गलत निर्णय न लेना।
धृति का महत्व
धृति मनुष्य को कठिन समय में सही निर्णय लेने की शक्ति देती है। धैर्य और दृढ़ता के बिना कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में उच्च आदर्शों का पालन नहीं कर सकता। इसलिए धृति को धर्म का प्रथम लक्षण माना गया है।
सीख
धृति हमें सिखाती है कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, हमें सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग से नहीं हटना चाहिए। धैर्य, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति जीवन की अनेक कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सकता है।
अगले लेख में हम धर्म के दूसरे लक्षण — “क्षमा क्या है? जानिए” — को विस्तार से समझेंगे।